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रचना 0693

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आज फिर चाँद उतरा ....मुझ पर चंद बैंगनी फ़ूल बिखेरे और सो गया…

आज फिर चाँद उतरा ....मुझ पर चंद बैंगनी फ़ूल बिखेरे और सो गया। बस कुछ ही देर आसमान खाली था और मेरा दामन चाँद से भरा हुआ। सुकून की ऐसी एक रात के लिए शुक्रिया। चलो एक चाहना तो कुबूल हुई।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें