भाषा / Language
जब कभी भी चित्रों से संवाद करती हूँ
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जब कभी भी चित्रों से संवाद करती हूँ ....
श्वेत कागज़ पर श्याम स्याहि सैंकड़ों रंगों की कविता बुन देती है ।चित्रों के रंग मेरे शब्दों में रिसते चले जाते हैं ।
संवाद .......चंद पलों का
मुट्ठी भर शब्दों से .....रंगों में डूबा हुआ।
श्वेत श्याम के बीच किसी पुल सा.......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें