कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0690

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जब कभी भी चित्रों से संवाद करती हूँ

जब कभी भी चित्रों से संवाद करती हूँ .... श्वेत कागज़ पर श्याम स्याहि सैंकड़ों रंगों की कविता बुन देती है ।चित्रों के रंग मेरे शब्दों में रिसते चले जाते हैं । संवाद .......चंद पलों का मुट्ठी भर शब्दों से .....रंगों में डूबा हुआ। श्वेत श्याम के बीच किसी पुल सा.......
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें