ककल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0672

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अपने इतने सारे किरदारों से ज़रा ज़रा सी वक़्त की कतरन बचा कर अ…

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अपने इतने सारे किरदारों से ज़रा ज़रा सी वक़्त की कतरन बचा कर अपने लिए कुछ पल सी लेती हूँ । उन पलों पर शब्द काढ़ना अच्छा लगता है ।देखो मेरे शब्दों की बेल आज कविता लग रही । कविता ओढ़ कर मैं कितनी पूर्ण लग रही .... है ना? 😊😊😊😊😊😊😊😊😊 Happy international happiness day
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें