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रचना 0671

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तुम इस लिये भी भाते हो

तुम इस लिये भी भाते हो .... कि खुद में जितना तुम्हें बुलाती हूँ तुम उतना ही आते हो बाक़ी सारी जगह मेरे होने के लिए रख जाते हो । Both are in love with me...😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें