कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0673

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शब्द तो हम सब में हैं

शब्द तो हम सब में हैं.... कुछ के बातूनी है..... कुछ के मूक कलमकार भी ... पाठक भी अनहद कविता एक साथ दो प्रेमियों को निभा ले जाती है ...😊😊😊😊😊 आप सब को विश्व कविता दिवस की शुभकामनायें। शब्द की डोर थामे रखिये मेरे साथ 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें