कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0670

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कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि मैं ऐसा तो कुछ भी नहीं…

कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है कि मैं ऐसा तो कुछ भी नहीं लिखती जैसा लोग अपनी भारी भरकम कविता कहानी में लिखते हैं। मैं तो बस चलते फिरते वाली कल्पना हूँ। आप सब भी ना .... बस 👌👌👌👌👌👌👌👌 मेरी रोज़ रोज़ की वही वही सी बातें और वही आप सब मेरे रोज़ाना वाले । इतना इतना स्नेह मेरे इत्तु इत्तु शब्दों को ..... खुशनसीब हूँ। कहो तो इक किताब निकाल ही लूँ अपनी 😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें