रात अपनी ख़ाली जगह चाँद से भर देती है और मैं शब्दों से ..... दोनों का इश्क़ मशगूल है।
रचना 066914 मार्च 2017भाषा / Languageहिन्दीEnglishरात अपनी ख़ाली जगह चाँद से भर देती है✦रात अपनी ख़ाली जगह चाँद से भर देती है और मैं शब्दों से ..... दोनों का इश्क़ मशगूल है।कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें