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रचना 0651

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रिक्ता

रिक्ता .... तुम्हें एक पंक्ति में लिखना हो तो यही कहूँगी कि तुम abilty यानि योग्यता, capabilty यानि सामर्थ्य और competence यानि क्षमता के बीच बुनी हुई इक ऐसी कहानी हो जिसकी धूरी औरत है। अपने किरदार में हर बार perfection ढूंढने और compromise कर सकने की आदत से जूझती उस माँ ,उस पत्नी ,उस बहू की कहानी जो तराजू के सिरों को balance करने के चक्कर में हर बार अपना इक टुकड़ा कभी इस तरफ कभी उस तरफ डालती रहती है ।इक दिन तो ख़ाली होना ही था उसे। बेहद सरल और काव्यात्मक ढंग से बुनी इस कहानी में औरत को हार हार कर जीतते हुए और जीत जीत कर भी हारते हुए पाया।Working lady की ममता को बनते ,सींचते ,खोते, रोते ,टूटते फिर एक लड़ाई खुद से लड़कर जीतते हुए पाया। बहुत कुछ सीखा देती है ये रिक्ता। women.... we only mean empathy needed. बहुत बहुत बधाई Manisha Sri जी ... आपके लिए ये मेरा स्नेह भर है... बेहद खूबसूरत कहानी लिखने के लिए बधाई ।😊😊😊😊 Keep writing.... कुछ कुछ जो आपकी रिक्ता मुझसे लिखा गयी वो आपको dedicate करना चाहूंगी... तुम्हारे बंद सवालों को मेरे खुले जवाब रास नहीं आएंगे सूरज को ढंका ही रहने दो। 😊😊😊😊😊 मुझमें बहुत सा पुरुष छिपा है बस बाहर नहीं आने देती कि जान गयी हूँ ......मेरा स्त्री होना मुझे ज्यादा श्रेष्ठ बनाता है ।😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें