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रचना 0634

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आकाश की तरह हूबहू .....कैनवास ला दो

आकाश की तरह हूबहू .....कैनवास ला दो टूटे ही सही कुछ घिसे ही सही ये अलग अलग रंगों वाले क्रेयोन्स हैं न ? इनसे कुछ ख्वाइशें उकेरनी हैं रंगनी हैं नाउमींदी भरना हैं उसमें इश्क़ उस चाँद से चमकीला उन तारों की ओढ़नी से कहीं सलीकेदार मुझे अपनी चाहनाएँ पहननी हैं आज रात..... मैं खूबसूरती के मायने बदल देना चाहती हूँ आज की रात .... उस आकाश के कैनवास पर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें