कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0589

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चाँद अधूरा भी खूबसूरत

चाँद अधूरा भी खूबसूरत , पूरा हो तो नायाब ख्वाइशें कम तो सुकून , पूरी हों तो कामयाब मेरी ज़िन्दगी ....... मेरा मुकाम सुरमई शाम में चमकता वो ताज़महल कभी अजूबा , कभी रिश्तो की मज़ार सा हमशक्ल मेरी यादें ...... मेरा सामान कभी जागा , कभी सोया सोया सपने सींचता कभी बादलों पर दिखे मचलता , कभी यूँ ही तनहा सिकुड़ता मेरा मन ........मेरा भगवान् शोख दिल कहो , या कहो रोशन बहार कभी रूह से , कभी इंसा से करती हूँ इज़हार मेरी मुस्कान ......मेरी पहचान मिलते बिछड़ते हम जैसे घडी की सूइयां धूप पड़े और थक जाऊ , मेरे बादल दे छैय्यां मेरे साथी .......मेरा गुमान अनगिनत तारों सी मेरी ख्वाइशें ओढ़ता हर दिन इक तारा मेरी मुट्ठी में छोड़ता मेरा हमसफ़र ........मेरा आसमान सादा दिल , सादे उदगार शायद दोस्त बनाने चले आते हैं विचार मेरी कल्पना ........ मेरा अभिमान आप सभी का शुक्रिया ......... सरकते साल में मेरे शब्दों का THANKS GIVING ☺☺☺☺☺
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें