कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0588

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मुझे हूबहू

मुझे हूबहू .... कहने के लिए...... ज़िगर देखने के लिए...... अंतस सुनने के लिए....... ह्रदय पहचानने के लिए.... मन और मानने के लिए........ दिल चाहिए ऐसा कुछ मायावी है तुम्हारी धड़कनों के पास ? इक रोज़ .......सिंदूरी शाम अपने "आसमान" से पूछ बैठी 😊😊😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें