कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0590

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"तुम" मुझे ......मेरी कविताओं में ढूंढो

"तुम" मुझे ......मेरी कविताओं में ढूंढो "मैं" कल - कल बहती नज़र आऊँगी जो "तुम"..... ढूँढना चाहोगे मुझे "कल्पना" में तो "मैं" छल छल छलकती बिखर जाऊँगी यकीन मानो ...."कल्पना" शब्दों में ... ज्यादा खूबसूरत नज़र आती है बाकी "ये कल्पना" तो ...... अंतस से होकर..... बस गुज़र जाती है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें