कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0586

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के सी जी को पढ़ने के लिए इक माहौल बनाना पड़ता है .... उनकी कह…

के सी जी को पढ़ने के लिए इक माहौल बनाना पड़ता है .... उनकी कहानियां महसूस ही तभी होती हैं जब आप शब्द शब्द को पोरों से छू कर पढ़ो।हर शब्द बेहद संजीदगी से लिखा हुआ ... बस वही दीखता हुआ जो वो दिखाना चाहते हैं । पहली कहानी दिल छू गयी। यही कहूँगी.... देखा जाये तो हर औरत की ज़िन्दगी उसके बयान से मेल नहीं खाती । सब में अंजलि है ज़रा ज़रा ।
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें