भाषा / Language
Finally इंतज़ार ख़त्म हुआ और आज दिल्ली दरबार मिली । साथ में…
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Finally इंतज़ार ख़त्म हुआ और आज दिल्ली दरबार मिली । साथ में मिले दो बन्दे ..राहुल और मोहित । दोस्त नहीं दो गुंथी हुई ज़िन्दगियाँ अलग अलग flavour वाली ।
इक दूसरे के पूरक .... Black and white नहीं ...grey
इक दूसरे में घुले हुए । पूरी कहानी में दिल्ली और उसका रोज़ाना इतनी बखूबी पिरोया गया है कि क्या कहने ।
राहुल मिश्रा का confidence जानलेवा है अंत तक और मोहित तो bygod take home material गढ़ दिया आपने ।
गिनके देखा तो 5 किरदारों की कहानी को आपने 175 पन्नों में ऐसा लिखा है कि इक सांस में पढ़ डाली ... 4 घंटे में इश्क़ ,इश्किया ,इशकज़ादे सब देख डाला।😊😊😊😊😊
ये पहली नावेल होगी जिसे पढ़कर मैं कितनी बार आपका लिखा सोच सोच कर हंसती रही खुद नहीं पता । यकीन मानिए इक मिनट भी चेहरे से मुस्कान नहीं हिली। आपके फूफाजी ने तो हमारी जान ही ले ली.. उनके शेर के बाद जो राहुलजी हर बार शमशेर हुए ... वो तो ultimate है 😊😊😊
A simple love story written extraordinarily with awsome punches and twists.. Satya Vyas जी you have nailed it.
Guys go for it ....
दिल्ली दरबार .... India is calling...
In one line ..... Entertainment entertainment........ entertainment 😊😊😊😊
Once again thank you Shailesh Bharatwasi ji .....and heartiest wishes to दिल्ली दरबार💐💐💐💐💐💐💐
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें