कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0562

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किश्तों में पढ़ रही थी आपको अब तलक ...आज शब्दों की सौगात मिल…

किश्तों में पढ़ रही थी आपको अब तलक ...आज शब्दों की सौगात मिली ....अपने पसंदीदा कलमकार के शब्दों को महसूस करने से बड़ा सुकून शायद ही कोई हो.... Feeling very happy .......😊😊😊😊 किताब को छूते ही लग रहा की एहसासों का समंदर रुका हुआ पन्नों पर..... पढ़कर मिलती हूँ .... Kishore ji😊😊😊😊😊😊 Thank u Shailesh Bharatwasi ji .....awsome gift....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें