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रचना 0563

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तुम मेरे लिए रेत क्यों हुए........ पहाड़ क्यों न हुए

तुम मेरे लिए रेत क्यों हुए........ पहाड़ क्यों न हुए ? तुम मेरे लिए पहाड़ क्यों हुए....... रेत क्यों न हुए ? रेत ...पहाड़... मैं.....सब वही सिर्फ..... "तुम" बदल गया पहली बार भी और फिर..... आखिरी बार भी
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें