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रचना 0553

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अक्सर सोचती हूँ तुम्हारा नाम लिख दूं

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अक्सर सोचती हूँ तुम्हारा नाम लिख दूं ..... उफ्फ.......इन अक्षरों में उलझ जाती हूँ उलझी उलझी इन अक्षरों संग सो जाती हूँ .... ख्वाबों में ये अक्षर .... खुद ब खुद सुलझ जाते हैं मेरे हो जाते हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें