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रचना 0552

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अँधेरे की सुगबुगाहट में

अँधेरे की सुगबुगाहट में .... तुम्हारा इक धेला भर होना ही .... मुझे जलाकर राख कर देता है सुनो चाँद ..... तुम.... कभी मत बदलना
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें