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रचना 0514

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याद है

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याद है ..... इस मोड से उस मोड़ तक हमने इक सदी ठहरा रखी थी .... जो आज भी .... सिर्फ तुम्हें दिखती है और ....सिर्फ मुझे महसूस होती है इस मोड़ से उस मोड़ तक .... इक रेशमी सदी ... हम तुम ....संग संग .....आज भी .....अब तलक
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें