भाषा / Language
अच्छा लगा ... तुमसे बतिया कर
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अच्छा लगा ... तुमसे बतिया कर
जैसे किसी उमींद का गुज़र होता है
जैसे चूड़ियां खनकती हैं
जैसे मुद्दत बाद मिल जाता है कोई अपना
जैसे चिराग कोई रोशन होता है
जैसे खुशबू कोई पसर जाती है
जैसे दयारों से हवा आती है
ये हकीकत है लेकिन.....
तुम चाहो तो ......कल्पना कह लो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें