कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0492

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आज कुछ अलग

आज कुछ अलग .... शब्द रोज़ सांझा करती हूँ आप सभी से .... आज मेरी डायरी के कुछ पन्ने सांझा कर रही हूँ .... क़तरा क़तरा जमा करके शब्दों का समुन्दर लगने लगी है मेरी डायरी सच .....खुद से उभरना .... मैंने शब्दों से सीखा है .... संजोके खुद को डायरी में रखा है ...😊😊😊😊
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें