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रचना 0491

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माना कि शब्द मुफ्त हैं मेरे

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माना कि शब्द मुफ्त हैं मेरे .... पर इक गुज़ारिश.... कि इस हुनर को copy paste करके मेरा नाम पोंछ कर अपना खुरच लेना ...आसान तो है ... पर दुख देता है । ऐसा ना करें ..... मुफ्त शब्दों की मुफ्त वाह वाही ....आपको कहीं नहीं ले जायेगी ....पर मुझे आपसे तो निसंदेह बहुत ऊंचा महसूस कराएगी । नाम ना पोंछें ....नाम कमाएं नादान परिंदों को मुफ्त advice 😂😂😂😂 😀😀😀😀😀😀 कल्पना पांडेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें