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रचना 0490

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कह देती हूँ अपनी ख्वाइशें इस समुन्दर से

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कह देती हूँ अपनी ख्वाइशें इस समुन्दर से इक वही है जो पलटकर हामी भरता है असीम मैं .....अनंत वो Perfect combination Mutual admiration
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें