भाषा / Language
तुम्हारे नाम वाले
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तुम्हारे नाम वाले ....
अक्षरों का रोज़..... मुझमें गहरा होते जाना
इश्क़ का पत्ता ...
रोज़ पहले हरा .....फिर सुनहरा होते जाना
खूबसूरत इक नज़्म लिखने जैसा है ....
मुकम्मल इक ग़ज़ल दिखने जैसा है .....
कलम का यूँ ही बांवरा हुआ जाना .......वो भी रोज़
ये भी इश्कियत सा ही है ....मेरे लिए
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें