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रचना 0461

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सिर्फ

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सिर्फ .... सोच और आदतें बदल देने से आप इक नए "खुद" से मिलेंगे जो कभी तुमसा नहीं था और ना कभी हो सकेगा तो फिर चलो..... बदल के देखें खुद से बिछड़ कर ....फिर मिल कर देखें ☺☺☺☺
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें