ककल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0463

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बस मेरे

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बस मेरे.... शब्द सोच श्रृंगार समन्वय साँझ सुबह तुम्हारे लिए..... अनहद रहें ......हमेशा तुम भी ... अनहद ही भाते हो ..... मुझे ....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें