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रचना 0460

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दिल" में ...."दिमाग" रखने वालों से तौबा

दिल" में ...."दिमाग" रखने वालों से तौबा ...... ख्वाब ......और ख्वाइशें कुतरना .... उन्हें हुनर सा ......लगता है आँगन में ..... उमींद से लदा दरख़्त भी .... बे समर ....शजर सा लगता है दिल में ... दिमाग़ कत्तई ना रखें पर ..... दिमाग़ में ....दिल हर हाल में रखें
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें