कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
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रचना 0425

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झूठ नहीं कहूँगी

झूठ नहीं कहूँगी ... बड़ी बेतरतीबी से फैले रहते हैं मेरे शब्द । ऐसा नहीं कि मुझे रख कर भूल जाने की आदत है ये खुद पसंद करते हैं हर कहीं जरा जरा अपना अस्तित्व टिका देना कागज़ तो बस .... नाम भर का संगी है मेरे शब्द तो .... मलंग मनमौजी अतरंगी हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें