कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0417

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खुद से बातें करती हूँ

खुद से बातें करती हूँ .... तो कहते हो .....कविता सी हूँ मेरे लिए तब तुमसे बतियाना तो कहानी ही हुआ ना मेरे लिए ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें