भाषा / Language
इश्क़ "तो इस छोर भी
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इश्क़ "तो इस छोर भी
उठ रहा वैसे ही
जैसे उस छोर है
कुछ धुँआ सा
कुछ धुंध सी
मैं
तुम
और हमारा सा
के बीच
अब तलक तैरता
छू कर देखो शायद...... यही इश्क़ है
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें