कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0330

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मैं सुन रही हूँ.... हमेशा की तरह

मैं सुन रही हूँ.... हमेशा की तरह ... हाँ.... ये ....जरुरी कत्तई नहीं कि .....तुम..... बोल भी रहे हो
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें