कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0323

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अबके

अबके .... "लोग क्या कहेंगे" ......वाला घूँघट नहीं खरीदा अपने लिए आज .... "मैं क्या सोचती हूँ ".....वाली चूनरी ओढ़ लायी हूँ अकेली हूँ ......पर..... महफ़ूज़ हूँ कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें