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रचना 0322

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सिल सिलेवार

सिल सिलेवार..... बंद पलकों से .... रूमानी लम्हे बीनना ..... वो भी ...पूरे दिन भर के इश्क़ से ...... मुश्किल है जरा .....
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें