भाषा / Language
तलाश
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तलाश ........
वो रोज़ मुस्कुराता
संवर कर निकलता है
दिनभर बैचैन भटकता है
सदियों से निराश डूबता है
जाने क्या ढूँढता है ?
वो क्या तलाशता है ?
मैंने "चाँद "से पूछा .........
बांवरा है ......ये "सूरज"
सच्चा "इश्क" ,सच्चा "ईमान" ढूंढता है
जब थक जाता है
काम पे रात मुझे लगाता है
उमींद कायम है
इस लिए मुस्कुराता पाली बदलने आता है
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें