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रचना 0320

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पाथर सा दिन

पाथर सा दिन ..... पाथर सी मैं ..... पथरीली ख्वाइशें .... पथरीली अजमाइशें.... सखी पथरीली.... परछाई मेरी और ...... इक पत्थर ..... मेरा हमसफ़र ....मेरा वजूद
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें