भाषा / Language
कुछ एक ...छोटे छोटे लम्हे
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कुछ एक ...छोटे छोटे लम्हे
दबे पाँव
चले आये मुझमें
और
इक गहरा सा बादल
टिका गए मुझमें ....
यादों का
मैं क्या कम थी .....
बटोरती रही
हर जज़्बात
हर एहसास
इन रिस्ते लम्हों से
और भीगती रही
उम्र भर
बस तेरे नाम की
किश्तों वाली
बारिश में
कभी .....तरबतर हो कर
कभी ....बस बूंद को छूकर
कभी ....खुद में खोकर
कभी ...बस खुद की होकर
कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें