कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0307

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कोई नहीं ऐसा

कोई नहीं ऐसा ..... जो मेरी "गिरहें" पढ़ सका "तुम "भी नहीं सिर्फ वो ..... सिर्फ वो ..... जो गिरहें ..... लगने नहीं देती लगती है तो ..... टिकने नहीं देती बहा ले जाती है .....दूर कहीं उडा ले जाती है ....और कहीं लफ़्ज़ों में घोल कर अंतर्मन को खोल कर कौन ? अरे ! वो..... वो है ना ........"मेरी कलम " कल्पना पाण्डेय Kalam ab zindagi ho chali hai .... Na likho to lag ta hai kuch kami si hai 😀😀😀😀😀😀
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें