कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0305

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बीते साल का कैलेन्डर

बीते साल का कैलेन्डर ...... 365 दिनों का हिसाब बता रहा और .....मैं उसे " 365 नए ख़्वाब "......थमा रही हिसाब लम्बा चलेगा ......हमारा रहने दो .......लेना देना वैसे भी ...... क्या मेरा .....क्या रह जाएगा तुम्हारा ? कैलेन्डर पलटो .... पहला ख्वाब बुला रहा कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें