कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0301

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कैसे कहूँ

कैसे कहूँ ..... इस "साल" भी ..... बस " तुम्हारे नाम" वाले ही ..... "आखर "चाहिए "ख्वाब "सजाने को ...... इस बार फिर .... वही पुरानी ...... रीत निभाने को कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें