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रचना 0227

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क्या हुआ गर

क्या हुआ गर ……. क्या हुआ गर ……. दिल तक पहुँचने का रास्ता लम्बा है दिलबर ? सुकून से वक़्त लगाता हुआ आ इस क़द्र खुद को थकाता हुआ आ राह को पनाह से मिलाता हुआ आ वापसी की गुंजाईश मिटाता हुआ आ मेरे नाम को नया पता लिखाता हुआ आ यहीं मिलूंगा ,ऐसी रट लगाता हुआ आ आखरी सफ़र में हूँ सब को फक्र से बताता हुआ आ गम ना कर…….. कम समय में दिल में उतरने वाले लोग कम समय में दिल से उतर भी जाते हैं
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें