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रचना 0226

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गैर जरुरी लम्हों में

गैर जरुरी लम्हों में ...... कुछ और कर लेते इस तरह .... यादें खोल कर .... देखने की जरुरत क्या थी बेमौसम बरसात में ..... भीगने की जरुरत क्या थी यूँ .....मुझे याद न किया करो तन्हाई को ..... और तनहा न किया करो गैर जरुरी लम्हों में ..... देखो .....कुछ जरूरी सा किया करो कल्पना पाण्डेय
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें