भाषा / Language
मुझे ही पाने के लिए .....मेरे ही होने का
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मुझे ही पाने के लिए .....मेरे ही होने का
एहसास खो रहे हो
जी रहे हो या .......
बस ......सांस ले रहे हो ?
ऐसे बेतुके सवाल
"ज़िन्दगी"
अक्सर पूछती दिखती है ......
हैरत से .....
हर चौराहे पर.....
हर मोड़ पर.....
आते जाते हर इंसान से .....
कभी मुस्कुराकर
कभी झल्लाकर
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें