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रचना 0204

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रही सही ख्वाइशें भी ....छू ली मैंने

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रही सही ख्वाइशें भी ....छू ली मैंने जिस लम्हा .... खुद की .... खुद से ...... खुद सी ......कही मैंने
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें