कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0151

भाषा / Language

आखरी फरमाइश

आखरी फरमाइश...... या खुदा ...... अब कुछ पल मुझे ऐसी जगह ले चल जहाँ मैं और सिर्फ मेरी परछाई हो अब मुझे वो ज़मी बक्श जहाँ ना मेरी जान पे बन आयी हो भूल जाने दे वो जन्म मेरा जो मैं जी के आयी हूँ स्त्री होने का जहर जो मैं कुछ देर पहले पी के आयी हूँ अभी अभी .... "मैं "और .....मेरे अपने अपने और ......सपने सपने और .....हकीकत हकीकत और ......सोच सोच और .......रिवाज़ रिवाज़ और .....रवायतें रवायतें और .....दर्द दर्द और ......फिर वही "मैं " ये "परिधि " पूरी करके आयी हूँ बेहद टूट कर आयी हूँ क़तरा क़तरा नुच के आयी हूँ दवा नहीं है मेरे जख्मों की मुझ पर तू दुआ रख दे मेरा वजूद कोई छू न सके अगले जनम में वो हक़ दे अब मुझे बस सो जाने दे अपनी पनाहों में खो जाने दे जागी हूँ उम्र भर इस चैन के लिए किसी दूसरी दुनिया का हो जाने दे
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें