कल्पनाशब्दों के बीच
भाषा / Language
सभी रचनाएँ

रचना 0139

भाषा / Language

बादलों में

बादलों में ..... कल्पना के चित्र ढूंढ रही हूँ सबको अजीब खुद को विचित्र ढूँढ रही हूँ वो जज़्बा वो जज़्बात ढूँढ रही हूँ कभी खुद में , कभी दूसरों में , इक हालात ढूँढ रही हूँ वो प्यार वो अधिकार ढूँढ रही हूँ कभी खुद में , कभी दूसरों में , इक व्यवहार ढूँढ रही हूँ वो मजबूर वो मजदूर ढूँढ रही हूँ कभी खुद में , कभी दूसरों में , इक मसरूफ ढूँढ रही हूँ वो ......मैं वो .....आप ढूँढ रही हूँ कभी खुद में , कभी दूसरों में , इक सुर्खाब ढूँढ रही हूँ
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें