कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0131

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ख्वाइशों की कूची में

ख्वाइशों की कूची में ताबीर का रंग भर दूँ इक तस्वीर बनाऊं जज़्बात की मिटटी को दीवानगी से मल लूँ इक बुत बनाऊं मुहब्बत के सुर को उल्फत से कस लूँ इक राग बनाऊं इंतज़ार के संदल को बेकरारी से तराश लूँ इक झरोखा बनाऊं सुलगते अरमान को कशिश से बाँध लूँ इक गुलदस्ता बनाऊं हुस्न पर कभी अदा कभी हया टांक लूँ इक लिबास बनाऊं इश्क की कलम को रूह में भिगो लूँ इक ग़ज़ल बनाऊं अपने "मैं "को तुम्हारे "तुम " में घोल लूँ इक "हम "बनाऊं दम भर बैठो तो सही कल्पना संग देखो ,मैं और क्या क्या बनाऊं ?
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें