कल्पनाशब्दों के बीच
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रचना 0132

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एहसास आ आ कर रूठ गए

एहसास आ आ कर रूठ गए शब्द जुड़ जुड़ कर टूट गए कागज़ सलवटों से भर रहा रखूं कहाँ जो दिल में उभर रहा
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें