एहसास आ आ कर रूठ गए शब्द जुड़ जुड़ कर टूट गए कागज़ सलवटों से भर रहा रखूं कहाँ जो दिल में उभर रहा
रचना 013223 मई 2015भाषा / Languageहिन्दीEnglishएहसास आ आ कर रूठ गए✦एहसास आ आ कर रूठ गए शब्द जुड़ जुड़ कर टूट गए कागज़ सलवटों से भर रहा रखूं कहाँ जो दिल में उभर रहाकल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें