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रचना 0094

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परचम मेरे देश का

परचम मेरे देश का यूँ लहराता जाय इब अमरीका आ गया रहा चीन घबराय रहा चीन घबराय पड़ौसी मलता आँखें ऊँची सोच का मान खुदा भी राखे Proud host type feeling😃😀😀😀😀
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें