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रचना 0082

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कितनी लाशें और चाहिए , क्या है तेरा मोल

कितनी लाशें और चाहिए , क्या है तेरा मोल अभी अभी डस गयी अमावस ,कई चाँद अनमोल आँगन आँगन क्रूर सिलसिला , त्राहि त्राहि का ढोल ममता बस चुप्प हो ली अब तो , दहशत तू मुंह खोल Kalam bhi naraaz ho chali hai Aur kuch likhna nahi chahti
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें