भाषा / Language
कितनी लाशें और चाहिए , क्या है तेरा मोल
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कितनी लाशें और चाहिए , क्या है तेरा मोल
अभी अभी डस गयी अमावस ,कई चाँद अनमोल
आँगन आँगन क्रूर सिलसिला , त्राहि त्राहि का ढोल
ममता बस चुप्प हो ली अब तो , दहशत तू मुंह खोल
Kalam bhi naraaz ho chali hai
Aur kuch likhna nahi chahti
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें