भाषा / Language
चाँद अधूरा भी खूबसूरत
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चाँद अधूरा भी खूबसूरत ,
पूरा हो तो नायाब
ख्वाइशें कम तो सुकून ,
पूरी हों तो कामयाब
मेरी ज़िन्दगी ....... मेरा मुकाम
सुरमई शाम में
चमकता वो ताज़महल
कभी अजूबा ,
कभी रिश्तो की मज़ार सा हमशक्ल
मेरी यादें ...... मेरा सामान
कभी जागा ,
कभी सोया सोया सपने सींचता
कभी बादलों पर दिखे मचलता ,
कभी यूँ ही तनहा सिकुड़ता
मेरा मन ........मेरा भगवान्
शोख दिल कहो ,
या कहो रोशन बहार
कभी रूह से ,
कभी इंसा से करती हूँ इज़हार
मेरी मुस्कान ......मेरी पहचान
मिलते बिछड़ते हम
जैसे घडी की सूइयां
धूप पड़े और थक जाऊ ,
मेरे बादल दे छैय्यां
मेरे साथी .......मेरा गुमान
अनगिनत तारों सी
मेरी ख्वाइशें ओढ़ता
हर दिन इक तारा
मेरी मुट्ठी में छोड़ता
मेरा हमसफ़र ........मेरा आसमान
सादा दिल ,
सादे उदगार
शायद दोस्त बनाने
चले आते हैं विचार
मेरी कल्पना ........ मेरा अभिमान
कल्पना पाण्डेय की फेसबुक लेखन-यात्रा सेसंग्रह में लौटें